शिकम में पल रहे बच्चे से गवाही दिलवाना

एक बार हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी र.अ. देहली के किले में बादशाह के साथ बात करने में मसरूफ थे और सल्तनत के दूसरे ओहदेदार भी साथ थे कि इतने में एक बदकार औरत हाजिर हुई और बादशाह से फरियाद करने लगी। उसने अर्ज किया कि हुजूर मेरा निकाह करा दें। मैं सख्त अजाब में मुब्तिला हूं। बादशाह ने पूछा कि किसके साथ निकाह करेगी और किस अजाब मे घिरी है। ? वह कहने लगी कि यह साहब जो आपके हाथ में हाथ डाले कुतुब साहब बने घूम रहे हैं इन्होंने मेरे साथ (नउजुबिल्लाह) हराम कारी की है जिससे मैं हामिला (गर्भवती) हो गई हूं। यह सुनकर बादशाह और हाजिरीन को बहुत हैरत हुई और सबने शर्म से गर्दनें झुका लीं। उधर कुतुब साहब के माथे पर शर्मिंदगी और गैरत से पसीना आ गया। आपको उस वक्त कुछ न सूझा और दिल ही दिल में अजमेर की तरफ रुख करके ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. को मदद के लिए याद किया। ख्वाजा साहब र.अ. ने जैसे ही अपने मुरीद के दिल से खामोश् चीख सुनी लब्बैक (हाजिर हूं) कहते हुए मदद के लिए फौरन आ गये। सबने देखा कि सामने से हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. तशरीफ ला रहे हैं।

आपने कुतुब साहब र.अ. से पूछा-मुझे क्यों याद किया है ? कुतुब साहब मुंह से तो कुछ न बोल सके लेकिन आंखों से आंसू जारी हो गये।

ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. ने इस बदकार औरत की तरफ रुख करके गुस्से से इर्शाद फरमाया-‘ऐ गर्भ में रहने वाले बच्चे ! तेरी मां, कुतुब साहब पर तेरे बाप होने का इल्जाम लगाती है, तू सच-सच बता।’

उस औरत के पेट से इतनी साफ और तेज आवाज आई कि मौजूद सभी लोगों ने साफ सुनी। बच्चे ने कहा-‘हुजूर ! इसका बयान बिल्कुल गलत है और यह औरत बड़ी हराम कार और झूठी है। कुतुब साहब के बदख्वाहों ने इसे सिखा कर भेजा हे ताकि इनकी इज्जत लोगों की नजर से गिर जाये।’ यह बयान सुनकर मौजूद लोगों को बहुत हैरत हुई। उस औरत ने अपने झूठ बोलने और इल्जाम लगाने का इकरार किया।

ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. ने फरमाया-‘इज्जत अल्लाह ही के हाथ में है। और वापस अपनी जगह पर आ गये। हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी र.अ. के अलावा सब ही सरकार गरीब नवाज र.अ. के तशरीफ लाने और गायब होने पर बहुत ज्यादा हैरत में थे।

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