नसब नामा पिदरी (पिता वंशानुक्रम)

आपके वालिद का वंशज निम्न प्रकार है-
हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन हसन चिश्ती र. अ.
बिन हज़रत ख़्वाजा गि़यासुद्दीन र. अ.
बिन हज़रत ख़्वाजा नजमुद्दीन ताहिर र. अ.
बिन हज़रत ख़्वाजा सैयद इब्राहीम र. अ.
बिन सैयद इदरीस र. अ.
बिन सैयद इमाम मूसा काजि़म र. अ.
बिन सैयद जाफ़र सादिक़ र. अ.
बिन सैयद मुहम्मद बाक़र र. अ.
बिन सैयद ज़ैनुल आबिदीन र.ता.अ.
बिन सैय्यिदना इमाम हुसैन रजि़ अ.
बिन अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली कर्रमल्लाहु वज्हुहू

वलादत बा सआदत

ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगां हज़रत ख़्वाजा मुर्इनुद्दीन हसन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैहि 537 हिजरी में ख़्ाुरासान प्रांत के सन्जर नामक गांव में पैदा हुए। सन्जर क़न्धार से उत्तर की जानिब है। और आज भी वह गांव मौजूद है। कई लोग इसको सजिस्तान भी कहते हैं। ख़्वाजा बुज़ुर्ग के वालिद माजिद का नाम सैयद गि़यासुद्दीन हसन है, वह आठवीं पुश्त में हज़रत मूसा काजि़म के पोते होते हैं। वालिदा माजिदा का नाम बीबी उम्मुलवरा उफऱ् बीबी माहे नूर है जो चन्द वास्तों से हज़रत इमाम हसन की पोती होती है। इसलिए आप बाप की तरफ़ से हुसैनी और माँ की तरफ़ से हसनी सैयद हैं।
आपकी वालिदा माजिदा हज़रत बीबी उम्मुलवरा से रिवायत है कि जिस वक़्त से मेरा नूरे नज़र मुर्इनुद्दीन मेरे शिकम (गर्भ) में आया, मेरा घर खैर व बरक़त से मामूर नज़र आने लगा। जो लोग हमारे दुश्मन थे मुहब्बत से पेश आने लगे। कर्इ बार मुझे ख़्ाूबसूरत ख़्वाब नज़र आते थे। जिस वक़्त अल्लाह तआला ने आपके जिस्म में जान डाली इस वक़्त से यह मालूम हो गया था कि आधी रात से लेकर सुबह तक मेरे शिकम से तस्बीह व तह्लील की आवाज़ आती थी। मैं उस मुबारक आवाज़ में सरशार हो जाती थी। जब आप पैदा हुए तो मेरा घर नूर से जगमगा उठा।

मनक़बत

हिन्द में घर-घर नसब मिल्लत का झन्डा कर दिया।

सफ़हा-ए-दुनिया पे दीं का बोलबाला कर दिया।

इश्क़े नामे मुस्तफ़ा हर दिल में पैदा कर दिया।

दैर का रुख़्ा जानिबे मेहराबे काबा कर दिया।।

मोतियों से दामने मक़सूद सबने भर लिए।

एक ज़मीने ख़्ाुश्क को पल भर में दरिया कर दिया।।

खूब फैलाइ जि़या शम्सुददुहा के नूर की।

मिल्लते रोशन से दुनिया में उजाला कर दिया।।

आपके फ़ैज़े क़दम से उठ गर्इ सब छूत-छात।

आपके इकराम ने अदना को आला कर दिया।।

कर दिया तौहीद के रिश्ते में सबको मुनसलिक।

हक़ के सब बिछड़े हुए बन्दों को यकजा कर दिया।।

हम से जो लाखों करोड़ों से न अब तक हो सका।

हल वो एक अल्लाह वाले ने मुअम्मा कर दिया।।

देखिये क्यों कर किया क़ब्ज़ा दिलों पर ख़्ाल्क के।

देखिये ख़्वाजा मुर्इनुíीं ने क्या क्या कर दिया।।