सकरात की हालत मे।

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. ने फरमाया कि जिसका मौत की तकलीफ बहुत हो उसके पास बा-वुजू सूरः यासीन सच्चे
दिल से पढ़े। इन्शाअल्लाह तआला सकराते मौत की सख्ती आसान हो जाएगी।

रोजगार पाने के लिए

हजरत गरीब नवाज र.अ. ने फरमाया-‘अगर किसी को नौकरी न मिलती हो और रोजगार की कोई सूरत न हो तो उसको
चाहिए कि महीने के पहले इतवार से सूरः यासीन शरीफ को इस तर्तीब से पढ़े कि सुबह की नमाज के बाद सूरज उगने से पहले दरूद शरीफ इक्तालीस बार फिर सूरः यासीन शरीफ ‘मुबीन’ दर ‘मुबीन’ पढ़े, शब्द ‘मुबीन’ का सात बार तकरार करता रहे आखिर तक। पूरी सूरः के बाद एक बार फिर पढ़े, फिर दरूद शरीफ इकतालीस बार पढ़े और दुआ मांगे चालीस दिन तक इसी तरह पढ़े, पहले ही चिल्ले में कामियाब होगा वरना दूसरा चिल्ला करे अगर फिर भी कामियाब न हो तो तीसरा चिल्ला भी करे, कामियाब होगा और कोई सूरत रोजगार की हो जाएगी।

कर्ज की अदायगी के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. ने फरमाया-‘कर्ज की अदायगी के लिए निम्न आयत को पांच बार हर नमाज में रोजाना
इक्तालीस दिन तक पढ़े, इन्शाअल्लाह तआला कर्ज से बहुत जल्द निजात पाएगा।
‘बिस्मिल्लाहिर्रमानिर्रहीम’ कुलिल्लाहुम-म मालिकल मुल्कि तू तिल्मुल-क मन तशाउ से ‘बिग़ैरि हिसाब’ तक।

लकवे के इलाज के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. फरमाते हैं कि अगर किसी को लकवे की बीमारी हो जाये तो किसी कामिल बुजुर्ग से सूर ‘जिलजाल’ को मय बिस्मिल्लाह शरीफ के लिखवाकर पाक बर्तन में धो कर पिया करे। बराबर इक्कीस दिन पीने से इन्शाअल्लाह आराम होगा।

दीवाने कुत्ते के काटने का इलाज

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. फरमाते हैं कि अगर किसी को दीवाने कुत्ते ने काटा हो तो चाहिए कि इस आयत को रोटी के चालीस टुकड़ों पर लिखकर हर रोज एक टुकड़ा चालीस दिन तक खाये।
‘इन-नहुम यकीदू-न क़ैदंव व अकीदु कैदा। फ़ मह्हिलिल काफि़री-न अमहिलहुम रुवैदा।’

लोगों को अपने हक में करने के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. ने फरमाया है कि अगर किसी को यह ख्वाहिश हो कि लोग मेरी इज्जत करें तो उसे
चाहिए कि जब सुबह को सूरज एक नेजा ऊंचा हो जाए तो उस वक्त उसकी तरफ मुंह करके साफ दिल से सूरः रहमान पढ़ना
शुरू करे ‘फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज्जि़बान’ कहते वक्त सूरज की तरफ उंगली से इशारा करे। पहले चालीस बार पढ़ कर जकात अदा करनी चाहिए। तरीका इस्तेमाल यह है कि जब किसी के सामने जाना हो तो सूरः रहमान एक बार पढ़ कर जाए, अगर वक्त न हो, तो सिर्फ ‘फबि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज्जिबान’ को तीन बार पढ़कर जाये।

चेचक दूर करने के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. फरमाते हैं कि चेचक के मौसम में या जब किसी के चेचक निकली हो तो सूरः रहमान का
गन्डा बनाकर गले में डाले, इस तरह कि सूरः रहमान पढ़ना शुरू करे और हर आयत ‘फ़बि अय्यि आलाई रब्बिकुमा तुकज्जि़बान’ के बाद दम करके गांठ दें आखिर तक ऐसा ही करे। बहुत जल्द आराम होगा। यह उपाय आजमूदा है।

बराए इस्तिखारा

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. ने फरमाया कि दो नफ्ल पढ़ कर सूरः कौसर पन्द्रह बार और इस दुआ को 360 बार पढ़े
फिर हाथ पर दम कर के सो जाये और हाथ सर के नीचे रखे-
‘या रशीदु अरशिदनी या अलीमु अल्लिम-नी मिनल हालिल कलामी।’

मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए

इस आयत को मुसीबत के वक्त पढ़े, इन्शाअल्लाह मुसीबत दूर हो जायेगी।
‘ला इला-ह इल्ला अन-त सुब्हान-क इन्नी कुन्तु मिनज्ज़ालिमीन।’

हर बीमारी व दर्द के लिए

बीमारी की जगह पर हाथ रखकर इस आयत को तीन बार पढ़ कर दम करे, इन्शाअल्लाह तआला सेहत होगी।
‘कल्बुहुम बासितुन जि़राऐहि बिलवसीद॰’