चार यार

जामा मस्जिद शाहजहांनी के दक्षिण दीवार के साथ ही एक छोटा सा दरवाजा है, जो पश्चिम की तरफ खुलता है। इस
दरवाजे के बाहर एक बड़ा कब्रिस्तान है। यह कब्रिस्तान झालरा की दीवार से लेकर जामा मस्जिद के पीछे दूर तक फैला हुआ है। इस कब्रिस्तान में बड़े-बड़े आलिमों, फाजिलों, सूफियों, फकीरों और औलिया-अल्लाह के मजारात हैं। मौलाना शम्सुद्दीन साहब र.अ. भी इसी जगह दफन हैं और मौलाना मुहम्मद हुसैन साहब इलाहाबादी र.अ. भी इसी जगह मदफून हैं। जिनका विसाल मज्लिसे सिमआ में हुआ था। कहा जाता है कि इसी कब्रिस्तान में चार मजार उन बुजुर्गों के भी हैं, जो हुजूर गरीब नवाज र.अ. के साथ तशरीफ लाये थे। इसी वजह से यह जगह चार यार के नाम से मशहूर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *