दुर्वेश की मन की बात जानकर उसकी हाजत पूरी करना

बुजुर्गों की मजलिस में तय हुआ कि सब लोग कुछ करामात दिखाएं, बस तुरन्त हजरत ख्वाजा उस्मान हारूनी र.अ. मुसल्ले के नीचे हाथ ले गये और एक मुट्ठी सोने के टुकड़े निकालकर एक दुरवेश को जो वहां हाजिर था, दिया और दुरवेशों के लिए हलवा मंगवाने की फरमाइश की। शेख अवहदुद्दीन किरमानी र.अ. ने एक लकड़ी पर हाथ मारा तो वह सोने की हो गयी। ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. ने कश्फ (ध्यान मग्न) से मालूम किया कि इन्हीं बुजूर्गों में एक दुरवेश बहुत भूखे हैं और शर्म की वजह से कुद भी न कह सकते थे, बस, आपने मुसल्ले के नीचे हाथ डाला और चार जौ की रोटियों निकालकर उस दुरवेश के सामने रख दीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *