तालीम व तर्बियत

इब्दताई तालीम घर पर हुई। आपके वालिद बुज़ुर्गवार एक बड़े आलिम थे ख़्वाजा साहब ने नौ साल की उम्र में क़ुरआन मजीद हिफ़्ज़ कर लिया और इसके बाद सन्जर के मक्तब में दाखि़ला हुआ। आपने यहां इब्तदाई तौर से तफ़्सीर, फि़क़्ह और हदीस की तालीम पाई और थोड़े समय में आपने काफ़ी इल्म हासिल कर लिया।

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