घाय के बच्चो का दूध देना

एक रोज हुजूर ख्वाजा गरीब र.अ. आना सागर के करीब बैठे हुए थे। उधर से एक चरवाहा गाय के कुछ बच्चों को चराता हुआ निकला। आपने फरमाया-‘मुझे थोड़ा दूध पिला दे।’ उसने ख्वाजा साहब र.अ. के फरमान को मजाक समझा और अर्ज किया-‘बाबा ! यह तो अभी बच्चे हैं, इनमें दूध कहां ? आपने मुस्कराकर एक बछिया की तरफ इशारा किया, और फरमाया- ‘भाई इसका दूध पियूंगा, जा दुह ला।’ वह हंसने लगा। आने दोबारा इर्शाद फरमाया-‘बरतन लेकर जा तो सही।’ वह हैरान होकर बछिया के पास गया तो क्या देखता है कि बछिया के थन पहले तो बराय नाम थे और अब उसके थनों में काफी दूध भरा हुआ है। उतः उसने कई बरतन भर कर दूध निकाला जिससे चालीस आदमियों ने पेट भर कर पिया। यह देखकर वह चरवाहा कदमों में गिर पड़ा और आपका गुलाम हो गया।

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