हजरत बीबी हाफिज जमाल र.अ.

आप सरकार गरीब नवाज र.अ. की इकलौती साहबजादी हैं। बहुत बड़ी आलिम, इबादतगुजार और पाक खातून थीं। हुजूर गरीब नवाज र.अ. ने आपको खिरका खिलाफत अता फरमाया। बहुत-सी औरतों ने आपके वसील से कुर्बे इलाही का दर्जा हासिल किया। हजरत शेख रजीयुद्दीन र.अ. के साथ आपका निकाह हुआ, जो काजी हमीदुद्दीन नागौरी र.अ. के साहबजादे थे। साहबजादी साहिबा ने बहुत सख्त इबादतें और रियाजतें की हैं। आपका मजार मुबारक हुजूरे गरीब नवाज र.अ. के पाईन में है।

यहां यह बयान करना दिलचस्पी से खाली न होगा कि एक रोज हुजूर गरीब नवाज र.अ. ने खास लोगों और अकीदतमन्दों की मजलिस में इर्शाद फरमाया-मेरी पहली हालत यह थी कि जो कुछ दिल से ख्वाहिश होती थी वह तुरन्त पूरी हो जाती थी लेकिन जब से औलाद हुई है दुआ के बगैर पूरी नहीं होती, हजरत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागौरी र.अ. ने जो इस मजलिस में मौजूद थे अर्ज किया, ‘हजरत ! होना भी ऐसा ही चाहिये था क्योंकि हजरत ईसा अ.स. जब पैदा नहीं हुए थे तो हजरत मरयम को जन्नत के मेवे बिना दुआ के आते थे लेकिन हजरत ईसा अ.स. की पैदाइश के बाद हजरत मरयम को हुक्म हुआ कि पेड़ से तोड़कर खुरमा खाओ। बिना दुआ और हरकत कुछ न मिलता था। यह सुनकर सरकार गरीब नवाज र.अ. बहुत खुश हुए।

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