हजरत ख्वाजा फखरूद्दीन र.अ.

हजरत गरीब नवाज र.अ. के सबसे बड़े साहबजादे हैं, माडल कस्बे में खेती करके अपना गुजर-बसर करते थे। आप बहुत बड़े बा-कमाल बुजुर्ग और जबरदस्त आलिम थे। हुजूर गरीब नवाज र.अ. के विसाल (देहान्त) के बीस साल बाद आपने कस्बा सरवाड़ में जो अजमेर शरीफ से 40 मील दूर है, सुकूनत इख्तियार की। मजारे पाक वहीं है जो एक तालाब के किनारे बहुत खूबसूरत जगह पर है। हर साल माहे शाबान की तीन से छः तक आपका उर्स बड़े धूमधाम से सरवाड़ में होता है। आपके पांच साहबजादे थे जिनमे हजरत ख्वाजा हुसामुद्दीन जिगर सोख्ता र.अ. बड़े बाकमाल और खुदा शनास बुजुर्ग थे। आपका मजार मुबारक साम्भर शरीफ में है। हर साल माहे रजब की तेरह और चैदह तारीख को आपको उर्स होता है।

सरकार गरीब नवाज र.अ. को हजरत ख्वाजा फखरूद्दीन र.अ. से बेहद मुहब्बत थी। आप खेती करके अपना गुजारा किया करते थे। एक बार हाकिम ने आपके मक्बूजा आराजी (खेती) की जमीन पर एतराज किया। हुजूर गरीब नवाज र.अ. खुद देहली जाकर सुल्तान शम्सुद्दीन अलतमश से फरमाने शाही हासिल करके वापस अजमेर शरीफ आ गये।

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