ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ र.अ. के हौसले और इरादे

यकीं मुहकम, अमल पैहम, मुहब्बत फातहे आलम, जिहादे जिन्दगानी में यह हैं मर्दों की शमशीरें।

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. ने हिन्दुस्तान में एक जबरदस्त रूहानी और समाज इंकिलाब को जन्म दिया। छूत-छात के इस भयानक माहौल में इस्लाम का नजरिया-ए- तौहीद अमली रूप में पेश किया ओर बताया कि यह सिर्फ एक ख्याली चीज नहीं है, बल्कि जिन्दगी का एक ऐसा उसूल है जिसको मानने के बाद जात-पात की सब ऊंच-नीच बेमायना हो जाती है। यह एक जबरदस्त दीनी और समाज इंकिलाब का एलान था।

इन दिनों, अजमेर राजपूत साम्राज्य का मजबूत केन्द्र और हिन्दुओं का धार्मिक गढ़ था। दूर-दूर से हिन्दू अपनी धार्मिक रस्मों को पूरी करने के लिए वहां जमा होते थे। एक ऐसे जबरदस्त राजनैतिक और धार्मिक केन्द्र में रहने का फैसला, न सिर्फ ख्वाजा साहब र.अ. के पक्के इरादे को बताता है, बल्कि गैर मामूली खुद इतमादी (आत्मविश्वास) का आईनादार है।

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