कब्र वालों की जि़यारत के लिए

ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. ने इर्शाद फरमाया कि किसी कामिल बुजुर्ग से मुरीद होकर रोज बाद नमाजे ईशा सोने से पहले
आयतुल कुर्सी और चारों ‘कुल’ पढ़ कर सीने पर दम करें। इसके बाद दस बार सूरः फातिहा और अस्मा-ए-बारी तआला (खुदा तआला के निन्नानवे नाम) पढ़ें फिर अस्मा-ए-मुबारक रसूले करीम स.अ.व. पढ़कर दाएं-बाएं पहलू पर दम करें। इसके बाद दरूद शरीफ सौ बार पढ़े और सर की तरफ दम करे। इसके बाद सूरः अ-लम नशरह पढ़ता हुआ सो जाये इन्शाअल्लाह जिस बुजुर्ग का ख्याल दिल में करके सोयेगा उनकी जियारत होगी। इक्तालीस दिन के बाद जिस कब्र के पास बावुजू दो जानू बैठ कर ध्यान करेगा, खुदा के हुक्म से साहिबे कब्र की जियारत होगी। उसका दिल साफ हो तो उससे बातचीत करने की तौफीक हो जाएगी। साहिब ेकब ्रस ेआन्तरिक फायद ेभी हासिल कर सकता ह।ै

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