गुम्बद शरीफ के अन्दर रोशनी

मगरिब की नमाज से करीब बीस मिनट पहले पुराने रिवाज के अनुसार रौजा-ए-मुनव्वरा में बिजली की सभी रोशनी बन्द
कर दी जाती है और खालिस मोम की बनी हुई मोमबत्तियां रोशन की जाती हैं, उन बत्तियों को रोशन करते वक्त नीचे लिखे शेर पढ़े जाते हैं। अन्दरूने गुम्बद के चारों तरफ चैखटों पर आईने लगे हैं और यह शेर उन पर सुनहरी शब्दों में लिखे हुए हैं।

ख़्वाजा-ए-ख्वाजगां मुईनुद्दीन(ख़्वाजाओं के ख़्वाजा मुईनुद्दीन हैं)
अशरफे औलिया-ए-रूए ज़मीं (ज़मीन के बड़े औलियाओं में सबसे बड़े हैं)

आफ्फताबे सपहरे कौनों मकां (आप कौन व मकां के सूरज हैं)
बादशाहे शरीरे मुल्क यकीं (आप अक़ीदत के देश की राजगद्दी के बादशाह हैं)

दर जमाल व कमाल ऊ चे सुख़न (आपके जमाल और कमाल का मुक़ाबला कोई नहीं कर सकता)
ईं मुबैय्यन बवद बहिस्ने हसीं (यह रोशन दली मजजत्रबूत कि़ले के समान है)

मतलऐ दर सिफ़ाते ऊ गुफ़तम (आपकी तारीफ़ में एक मतलापेश कर रहा हूं)
दर इबारत बुवद चू दुर्रे सर्मी (जिसकी इबारत अनमोल मोती है)

ऐ दरत कि़ब्ला गाहे अहले यक़ीं (अक़ीदत मन्दों के लिए आपका दर कि़ब्ला है)
बर दरत मेहरो माह सुदा जबीं (आपके दर पर चांद और सूरज पेशानी रगड़ते हैं)

रूऐ बर दरगहत हमीं सायन्द (आपकी चैखट पर पेशानी रगड़ते हैं)
सद हज़ारां मलिक चू खुसरूए चीं (चीन के राजा जैसे सैंकड़ों बादशाह)

ख़दिमाने दरत हमा रिज़वा (आपके दरबार में ख़दिम गोया जन्नत के पहरेदार हैं।)
दर सफ़ा रोज़ाअत चूं खुल्दे बरीं (आपकी मज़ार मुबारक ख़ुल्दे बरीं की तरह है)

ज़र्रा-ए-ख़के ऊ अबीर सरिश्त (आपके मज़ार मुबारक की ख़ाक का हर ज़र्रा अबीर की तरह है)
क़तरा-ए-आबे ऊ चू माए मोई (आपके दर के पानी की एक एक बूंद जगमगाते मोती की तरह है)

इलाही ता बुवद खुर्शीद व माही (या इलाही जब तक चांद सूरज क़ायम है)
चिरागे चिश्तियां रा रोशनाई (चिश्तियों की चिराग़ को रोशन रख)

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