मस्जिद सन्दलखाना

इस मस्जिद का बयान अहाता-ए-चमेली के साथ हो चुका है। यह मस्जिद सुल्तान महमूद खिलजी की बनवाई है। जहांगीर
के जमाने में मस्जिद खस्ता व शिकस्ता (टूटी-फुटी) हो चुकी थी। जहांगीर बादशाह ने चार दर बढ़ा कर नयी बनवाई। शहन्शाह औरंगजेब ने इसकी मरम्मत कराई, इस वजह से यह मस्जिद तीनों बादशाहों के नामों से मशहूर है।

उर्स शरीफ के दिनों में एक रजब से नौ रजब तक मजार अक्दस पर पेश करने के लिए सन्दल की घिसाई इसी मस्जिद में
होती है जिसकी वजह से यह सन्दल मस्जिद के नाम से मशहूर हो गयी है।

हुजूर ख्वााज गरीब नवाज र.अ. के मजारे अक्दस से सुबह व शाम जो फूल उतरते हैं वह इसी मस्जिद के एक गहरे ताक में कुछ देर के लिए रखे जाते हैं इस वजह से इस मस्जिद को मस्जिद फूल खाना भी कहते हैं।

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