क़त्ल हुई लड़के को फिर से जिंदा करना

एक रोज एक औरत रोती-चिल्लाती आपकी खिदमत में हाजिर हुई। बदहवासी व बेताबी में आपसे अर्ज करने लगी-
‘हुजूर ! शहर के हाकिम ने मेरे बेटे को बेकुसूर कत्ल कर दिया है, खुदा कि लिए आप मेरी मदद कीजिये।’

उस औरत की दर्द भरी फरियाद से आपके अन्दर रहम व हमदर्दी पर्दा हो गयी। आप तुरन्त असा-ए- मुबारक हाथ में लेकर उठे और उस औरत के साथ रवाना हो गये। बहुत से खुद्दाम और हाजरीन भी आपके साथ हो गए। जब आप लड़के की बे-जान लाश के पास पहुंचे तो बहुत देर तक चुप रहे और खड़े-खड़े उसकी तरफ तकते रहे, फिर आगे बढ़े और उसके जिस्म पर हाथ रखकर फरमाया-‘ऐ मक्तूल ! अगर तू बेगुनाह मारा गया है तो अल्लाह के हुक्म से जिन्दा हो जा।’ अभी आपकी जबाने मुबारक से ये शब्द निकले ही कि मक्तूल (मुर्दा) जिन्दा हो गया। आपने उसी वक्त फरमाया-‘बन्दे को अल्लाह तआला से इस कदर निस्बत (सम्बन्ध) पैदा करनी चाहिए कि जो कुछ खुदा-ए-तआला की दरगाह में अर्ज करे कुबूल हो जाए। अगर इतना भी न हो तो फकीर नहीं है।

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