अजमेर से मुर्शिद का मजार देखना

एक रोज हुजूर ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. अकीदतमन्दों में बैठे हुए वअज व नसीहत फरमा रहे थे कि आपकी नजर दायीं तरफ पड़ी, आप तुरन्त ताजीम (सम्मान) के लिए खड़े हो गये। इसके बाद यह सिलसिला जारी रहा कि जब भी दायीं तरफ नजर जाती तो आप ताजीम के लिए खड़े हो जाते। जब वअज खत्म हुआ और लोग चले गये तो आपके खास खादिम ने अर्ज किया-‘हुजूर आज यह क्या हालत थी कि जब भी आपकी नजर दायीं तरफ पड़ती आप ताजीम के लिए खड़े हो जाते थे।’ आपने फरमाया-‘उसी जानिब मेरे पीर व मुर्शिद का मजार हे और जब मेरी निगाह उस तरफ जाती तो रोजा-ए-अकदस नजर आता, सम्मान के लिए खड़ा हो जाया करता था।

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