पृथ्वीराज को दावते इस्लाम

शादी देव और अजय पाल के इस्लमा कुबूल करने के बाद हुजूर ग़रीब नवाज़ र.अ. ने पृथ्वीराज के पास पैगाम भेजा कि-‘इस्लाम कुबूल करो। इसी में तुम्हारी भलाई है। बादशाहत भी हाथ से न जायेगी और मरने के बाद भी चैन मिलेगा, वरना खूब याद रखों कि तुम्हारे लिये यहां और वहां दोनों जगह बड़ी मुसीबत का सामना है और उस वक्त तुमसे कुछ बनाये न बन पड़ेगा।’ मगर उसके दिल पर कुछ असर न हुआ और ख़्वाजा साहब का यह पैग़ाम सुनते ही आग बगोला हो गया। उसने इम्तिहान लेने के लिए एक शख्स को हुजूर की खिदमत में मुरीद होने के लिए भेजा। जब उसने हुजूर की खिदमत में मुरीद बनना चाहा आपने उसे मुरीद बनाने से इन्कार कर दिया। मालूम होने पर आपने फरमाया कि मुरीद न करने के तीन कारण है। पहला यह कि तेरे दिल में दगा और गन्दगी है। दूसरा यह कि शिर्क तेरी तबियत में इस तरह बसा हुआ है कि तू खुदा के सिवा हर एक के सामने सर झुकायेगा। तीसरा यह कि मैंने तेरे लिए लौहे महफूज में देखा है कि तू दुनिया से बेईमान जायेगा। यह सुनकर वह शख़्स हैरान हो गया और राजा की खिदमत में जाकर सब हाल बयान कर दिया।

ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ र.अ. और पृथ्वीराज के बीच कशमकश बराबर जारी थी और अब दुश्मनी और भी बढ़ गयी। राजा का जब किसी तरह हुजूर ग़रीब नवाज़ र.अ. पर बस न चला तो उसने सारे मुसलमानों पर जुल्म ढाने शुरू कर दिये। उसका एक दरबारी जो मुसलमान होकर ख़्वाजा साहब र.अ. का मुरीद हो गया था उसको खूब तकलीफे दी गयीं। उस मुरीद ने ख़्वाजा साहब र.अ. की खिदमत में हाजिर होकर फरियाद की कि मेरी सिफारिश की जाये ताकि राजा अपने जुल्म से बाज आये। ख़्वाजा साहब की मुरीद नवाजी मशहूर है। आपने राजा को इससे बाज रहने की सिफारिश की लेकिन राजा ने एक न मानी और गुससेू में हुक्म दिया कि यहां के राजा होने के नाते हमारा हुक्म है कि एक हफ्ते के अंदर अपने साथियों समेत अजमेर खाली कर दो वरना सख्ती से निकाल दिया जायेगा। जब यह हुक्मनामा हमारे ख्वाजा साहब र.अ. के पास पहुंचा तो आपको जलाल आ गया और फरमाया-‘हमने पृथ्वीराज को जिन्दा गिरफ्तार करके लश्करे इस्लाम के हवाले कर दिया। ख्वाजा साहब र.अ. की जबाने मुबारक से यह जुम्ला सुनकर लोग हैरान थे, मगर उन्हें यकीन था कि ख्वाजा साहब र.अ. की जबान से निकली हुई बात बेअसर नहीं हो सकती इसीलिए बड़ी बेकरारी से नतीजे का इन्तिजार करने लगे।

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