रौजा-ए-मुनव्वरा

रौजा-ए-मुनव्वरा और गुम्बद शरीफ का काम सुल्तान महमूद खिलजी के जमाने में शुरू हुआ, मगर कई इतिहासकार
लिखते हैं कि रौजा-ए-मुनव्वरा और गुम्बद शरीफ ख्वाजा हुसैन नागौरी र.अ. ने बनवाई है। गुम्बद का अन्दरूनी हिस्सा पत्थर का है जिनको चूने से जोड़ा गया है। गुम्बद के बाहर का हिस्सा सफेद
है जिस पर चूने का प्लास्टर चढ़ा हुआ है।

गुम्बद के अन्दरूनी हिस्से में सुनहरी व रंगीन नक्श व निगार बने हुए हैं। सफेद गुम्बद पर सोने का बहुत बड़ा ताज लगा है।
इसको नवाब कलब अली खां (रामपुर) के भाई हैदर अली खां मरहूम ने नज्र किया था। मजारे अक्दस का तावीज संगमरमर का है। मजारे अक्दस हमेशा मखमल के कब्र-पोशों से ढका रहता है। उन पर ताजा गुलाब के फूलों की चादरें चढ़ी रहती हैं।
छप्पर-खट के बीच में सुनहारा कटेहरा लगा है जो शहन्शाह जहांगीर ने बनवाकर चढ़ाया था।

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