ज़ालिम हाकिम को सजा देना

कहते हैं कि एक रोज आपका एक मुरीद आपकी खिदमत में हाजिर हुआ। उस वक्त आप इबादत में थे। जब आप इबादत कर चुके तो उसकी तरफ ध्यान दिया। उसने अर्ज किया-‘हुजूर ! मुझे हाकिमे शहर ने बिना किसी कुसूर के शहर बदर होने का हुक्म दिया है। मैं बहुत परेशान हूं।’ आपने कुछ देर ध्यान लगाया और फरमाया-‘जाओ, उसको सजा मिल गयी।’ वह मुरीद जब शहर में वापस आया तो खबर मशहूर हो रही थी कि हाकिम शहर घोड़े घिरकर मर गया

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